Indus

Thursday, October 28, 2010

कुछ सबको आज सुनाने को दिल करता है

कुछ सबको आज सुनाने को दिल करता है
दूर तारों में मेरा भी कोई झिलमिल करता है
अपनों को छोड़ यही तारो से हिलमिल रहता है
सोच उसे हर पल मन सावन सा रिमझिम रहता है
हर पल उसके साथ बिताया बचपन रहता आँखों में,
कानो में उसकी ही आवाजे गूंजा करती हैं
वो मेरी छोटी बहन, मेरी हर पल की संगी साथी,
छोड़ मुझे, ऊपर तारों से मिलकर उनसे हिलमिल रहती है

8 comments:

  1. ओह्! मार्मिक अभिव्यक्ति।ाब तो उम्र भर उसे सितारों मे रहना है। उसकी आत्मा को शान्ति मिले बस । दर्द भी रचना। आशीर्वाद।

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  2. उफ्फ़ क्या कहूँ अब !!!!!

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  3. aap achchhhaa likhti hain..

    par aap kavitaayein utnaa achchhaa nahin likhti...

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  4. Jii Manu Jii
    Mai Kavitaye achhi nahi likhati par kuchh or to maine kabhi likha hi nhi to achha kaise likhungi??

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  5. मार्मिक अभिव्यक्ति

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  6. वो जहाँ रहे खुश रहे .... बहुत अच्छी लगी आपकी रचना ... दिल से लिखी रचना ...

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  7. दिल से लिखी रचना ...

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