Indus

Monday, October 11, 2010

मैं एक नन्ही सी कविता

मैं एक नन्ही सी कविता
जो सबको खुश कर जाऊं
कभी मैं बहती सरिता
जो मन को शीतल कर जाऊं
किसी पल मैं उडती तितली
हर दिल को बहलाऊं
कभी मैं बन एक हिरनी
वन उपवन में छा जाऊं
कभी मै बनकर हसीं
सबके होठों पर मुस्काऊं
कभी बनू मै कटुता औ
आँखों से आंसू छल्काऊं
कभी बनकर ख़ुशी इक
हर जीवन को हरषाऊ
कभी लाकर लहर इक गम की
लाखो आंसू दे जाऊं

12 comments:

  1. अंतिम पंक्तियाँ दिल को छू गयीं.... बहुत सुंदर कविता....

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  2. ब्लॉग को पढने और सराह कर उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया.

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  3. मन के उपजे विचार बहुत सुन्दर ढंग से पिरोये हैं

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  4. सुन्दर भावाभिव्यक्ति !

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  5. बहुत ही सुन्‍दर एवं भावमय प्रस्‍तुति ।

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  6. bahut hi bhavpravan prastuti.eksachchi kavita ka roop.
    मैं एक नन्ही सी कविता
    जो सबको खुश कर जाऊं
    कभी मैं बहती सरिता
    जो मन को शीतल कर जाऊं
    किसी पल मैं उडती तितली
    हर दिल को बहलाऊं
    कभी मैं बन एक हिरनी
    वन उपवन में छा जाऊं
    कभी मै बनकर हसीं
    सबके होठों पर मुस्काऊं
    aabhar----------------------poonam

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  7. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति ...आप उपवन उपवन गुलशन गुशन छाएं..

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  8. लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

    जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

    मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

    भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

    अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

    थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

    http://umraquaidi.blogspot.com/

    उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
    “उम्र कैदी”

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  9. मैं एक नन्ही सी कविता
    जो सबको खुश कर जाऊं ...


    सुंदर कविता है ....भावनाओं से भरी ....

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  10. कभी मै बनकर हसीं
    सबके होठों पर मुस्काऊं
    बस यही बने रहना। सुन्दर कविता। बधाई।

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  11. एक खूबसूरत और मासूम कविता

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